Saturday, November 24, 2018

लड़की है वो लड़ाकू सी



लड़की   है  वो  लड़ाकू   सी  |
  लड़ती है वो  अपनों के लिये  |
 हा देखा मैंने उसे लड़ते हुए  उन सपनों  के  लिए   ||
यह सपने  भारत   देश  के है |
दौड़ती भागती वो घोड़ो  की तरह ,यह घोड़े जैसे रेस के है ||
है कमजोरियां उसमें  ऐसे  भी  |
उनसे पार  निकलेगी वो कैसे भी ||
साहित्य, कविताए है उसके गहने जेवरात |
 वो ढूंढ लेती फूल ,पक्षी और नदिओं मैं भी उल्लास || 
आसमानो से भी ऊँची है उसकी उड़ान |
है आत्मनिर्भरता ही  उसकी पहचान ||
बनेगी वो  सबका आँखों  का तारा |
होगा  एक दिन उससे यह जग उजियारा ||
लड़की   है  वो  लड़ाकू   सी  |
  लड़ती है वो  अपनों के लिये  |     
 हा देखा है  मैंने उसे लड़ते हुए  उन सपनों  के  लिए   || ||