लड़की है वो लड़ाकू सी |
लड़ती है वो अपनों के लिये |
हा देखा मैंने उसे लड़ते हुए उन सपनों के लिए ||
यह सपने भारत देश के है |
दौड़ती भागती वो घोड़ो की तरह ,यह घोड़े जैसे रेस के है ||
है कमजोरियां उसमें ऐसे भी |
उनसे पार निकलेगी वो कैसे भी ||
साहित्य, कविताए है उसके गहने जेवरात |
वो ढूंढ लेती फूल ,पक्षी और नदिओं मैं भी उल्लास ||
आसमानो से भी ऊँची है उसकी उड़ान |
है आत्मनिर्भरता ही उसकी पहचान ||
बनेगी वो सबका आँखों का तारा |
होगा एक दिन उससे यह जग उजियारा ||
लड़की है वो लड़ाकू सी |
लड़ती है वो अपनों के लिये |
हा देखा है मैंने उसे लड़ते हुए उन सपनों के लिए || ||
